नर्मदेश्वर शिवलिंग के रंगों की कोई निश्चित सार्वभौमिक गिनती नहीं है। प्राकृतिक पत्थर में मुख्य रंग के साथ हल्की-गहरी पट्टियाँ, धब्बे और कई रंगों का मेल हो सकता है। इसलिए केवल पाँच या सात रंग बताकर सभी पत्थरों को उस सूची में बाँधना सही नहीं है।
कौन-से रंग दिखाई दे सकते हैं?
व्यवहार में गहरे, भूरे, लाल-भूरे, धूसर और हल्के क्रीम जैसे रंग तथा उनके मिश्रण देखने को मिल सकते हैं। हर पीस में यह सभी रंग होना जरूरी नहीं। बाजार में सफेद, नीलकंठ या अन्य रंग-आधारित नामों का प्रयोग भी होता है; नाम से खनिज-वर्ग या नदी-स्रोत निश्चित नहीं होता।
क्या रंग प्राकृतिक है?
किसी विशिष्ट वस्तु के बारे में विक्रेता से पूछें कि उस पर रंग, कोटिंग या अन्य उपचार किया गया है या नहीं। केवल चमक देखकर कृत्रिम रंग होने का निष्कर्ष न निकालें; पॉलिश भी सतह को चमक देती है। इसी तरह चमकीला दिखना प्राकृतिक होने का प्रमाण नहीं है।
फोटो और वास्तविक पत्थर में अंतर
गीला पत्थर सूखे पत्थर से गहरा दिखाई दे सकता है। पीली रोशनी, सूर्य की दिशा और मोबाइल कैमरे की प्रोसेसिंग भी रंग बदलती है। ऑर्डर से पहले दिन के उजाले में फोटो, सूखी सतह और छोटा वीडियो माँगें। स्क्रीन पर दिखने वाले रंग में थोड़ा अंतर संभव है।
रेखा, पट्टी और धार्मिक नाम
एक रंग की पट्टी जनेऊ या तिलक जैसी समझी जा सकती है। ये नाम धार्मिक व्याख्या हैं, वैज्ञानिक रंग-वर्ग नहीं। किसी खास रंग को स्वास्थ्य, संपत्ति या सुरक्षा का निश्चित कारण नहीं माना जा सकता।
पसंद का रंग कैसे चुनें?
वास्तविक पीस देखें, मंदिर की जगह और अपनी पसंद के अनुसार चुनें। आकार, स्रोत और स्थिर आधार को रंग के बराबर महत्व दें। दुर्लभ रंग की ऊँची कीमत देने से पहले स्पष्ट फोटो और दावे का आधार पूछें।